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शिवपञ्चाक्षर स्तोत्र के रचनाकार, आदि गुरु शंकराचार्य, जिनके हृदय में असीम शिवभक्ति समाहित थी, इस अद्भुत स्तोत्र के माध्यम से हमारे ह्रदयों में शिव के दिव्य स्वरूप का महत्त्वपूर्ण उद्घाटन करते हैं। यह स्तोत्र, जो 'नमः शिवाय' के पंचाक्षरी मंत्र पर आधारित है, पाँच प्रमुख तत्वों को अभिव्यक्त करता है। प्रत्येक अक्षर अपने भीतर जीवन के आन्तरिक तत्त्वों का प्रतिनिधित्व करता है:
- न– पृथ्वी तत्व,
- म– जल तत्व,
- शि– अग्नि तत्व,
- वा– वायु तत्व,
- य– आकाश तत्व।
यह स्तोत्र, न केवल शिव के अस्तित्व को व्याख्यायित करता है, बल्कि उनके अमर रूप और अविनाशी शाश्वतता का असीम दर्शन प्रदान करता है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
महामृत्युंजय मंत्र का जिक्र सबसे पहले ऋग्वेद में मिलता है और यह यजुर्वेद में
भी उपस्थित है। यह मंत्र भगवान शिव की महिमा का प्रतिक है, जिन्हें
त्रिनेत्रधारी रुद्र और महादेव के रूप में पूजा जाता है। शिव के उग्र रूप को
ध्यान में रखते हुए इसे 'रुद्र मंत्र' भी कहा जाता है, और उनकी तीन आँखों
(त्रयंबक) को निर्देशित करते हुए इसे त्रयंबक मंत्र के रूप में संबोधित किया
जाता है। यह मंत्र मृत्यु से मुक्ति पाने का एक शक्तिशाली साधन माना जाता
है।
महामृत्युंजय मंत्र का उचारण करने से न केवल मृत्यु का भय दूर होता है, बल्कि
व्यक्ति की समृद्धि, सुख और शांति भी सुनिश्चित होती है। यह मंत्र विशेष रूप से
उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो मानसिक और शारीरिक कष्टों से पीड़ित
हैं।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
त्रयंबकम्: यह शब्द त्रि-नेत्र वाले शिव के रूप में भगवान को संबोधित करता है। यजामहे: हम उनकी पूजा करते हैं, उन्हें सम्मान देते हैं। सुगंधिम्: यह भगवान शिव की आत्मा की मीठी महक और दिव्यता को व्यक्त करता है। पुष्टिवर्धनम्: वह जो जीवन के पोषण और समृद्धि को बढ़ाता है। उर्वारुकमिव बन्धनान्: ककड़ी के तने की तरह हमें संसार के बंधन से मुक्त करें। मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्: हमें मृत्यु से मुक्ति और अमरता का आशीर्वाद दें। इस मंत्र के द्वारा हम भगवान शिव से यह प्रार्थना करते हैं कि वे हमें संसार के बंधनों से मुक्त करके अमरता प्रदान करें। यह मंत्र न केवल मृत्यु से डर को दूर करता है, बल्कि जीवन की कठिनाइयों को भी आसान बनाता है।
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